7 सितम्बर 1982 को जन्मे जॉर्ज बेली 2005-06 के घरेलु सीज़न के लिए तस्मानिया की टीम में तब चुना गया जब अधिकतर खिलाड़ी चोट के कारण बाहर थे.
बेली ने अपने चयन का पूरा फायदा उठाते हुए 778 रन बनाए जिसमें 3 शतक शामिल थे. बल्ले के साथ लगातार प्रदर्शन और अपनी नेतृत्व क्षमता के चलते 2009-10 के सीज़न के लिए बेली को तस्मानिया का कप्तान बना दिया गया. 2010-11 में बेली ने अपनी कप्तानी में तस्मानिया को दूसरी बार शेफील्ड शील्ड की ट्रॉफी जिताई. चयनकर्ताओं ने बेली के प्रदर्शन और कप्तानी को देख उन्हें भारत के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की टी20 टीम में चयनित किया. सब को हैरान करते हुए चयनकर्ताओं ने बेली को कैमरन वाइट की जगह बिना कोई अनुभव होते हुए भी टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया. बेली ने इस ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए ऑस्ट्रेलिया को 2012 टी20 विश्व कप के सेमीफइनल तक पहुँचाया जहाँ उन्हें गत विजेता वेस्टइंडीज़ के हाथों पराजय मिली.
बेली को एकदिवसीय क्रिकेट में मौका वेस्टइंडीज़ दौरे पर मिला. घरेलु क्रिकेट में मध्य क्रम में निरंतरता को बेली ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी दर्शाया और जल्द ही वे ऑस्ट्रेलिया एकदिवसीय टीम में मध्य क्रम में अपनी जगह सुरक्षित रखने में कामयाब रहे. जनवरी 2013 में श्रीलंका के खिलाफ श्रंखला के पहले दो मैचों के लिए नियमित कप्तान माइकल क्लार्क को आराम देने के कारण बेली को कप्तानी की ज़िम्मेदारी दी गई और उसे बखूबी निभाते हुए बेली ने 89 रन की शानदार पारी खेल अपनी टीम को आसानी से जीत दिला दी.
पर्थ के वाका मैदान पर बेली ने अपना पहला शतक बनाया और वेस्टइंडीज़ के खिलाफ 125 रनों की आकर्षक पारी खेली. यह पारी इसलिए और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण थी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया 98/6 की बेहद खराब हालत में थी जिसे बेली ने 266 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया. बेली का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर काफी देर से शुरू हुआ लेकिन इसके बावजूद वे जल्द ही ऑस्ट्रेलिया टीम का अभिन्न अंग बन गए.

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