शेन वार्न ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 145 टेस्ट और 194 एकदिवसीय मैचों में 13 अर्धशतकों के साथ कुल 4172 रन बनाए और 1001 विकेट लिए। शायद विश्व क्रिकेट के सब से महान गेंदबाज़ शेन वार्न ने लेग स्पिन की परिभाषा ही बदल दी. शेन वार्न ने अपना ही एक स्टाइल बनाया जहाँ वो बोलिंग लाइन तक चल कर जाते थे और फिर एक झटके से राउंड आर्म एक्शन के साथ अपनी कलाई के जादू से बल्लेबाज़ों के छक्के छुड़ा देते थे.
पूरा नाम -शेन कीथ वार्न
जन्म - सितम्बर 13, 1969 फंटरी, गली, विक्टोरिया
प्रमुख टीमें - ऑस्ट्रेलिया, हैम्पशायर, राजस्थान रॉयल्स, आईसीसी विश्व XI,
विक्टोरिया, मेलबोर्न स्टार्स
भूमिका - गेंदबाज़
बल्लेबाज़ी शैली - दाएं हाथ के बल्लेबाज़
शेन वार्न के बल्लेबाज़ी कीर्तिमान:
| बल्लेबाज़ी | मैच | रन | सर्वश्रेष्ठ | औसत | 100 | 50 |
| टेस्ट | 145 | 3154 | 99 | 17.32 | 0 | 12 |
| एकदिवसीय | 194 | 1018 | 55 | 13.05 | 0 | 1 |
| टी२० | - | - | - | - | - | - |
| प्रथम श्रेणी | 301 | 6919 | 107* | 19.43 | 2 | 26 |
| लिस्ट ए | 311 | 1879 | 55 | 11.81 | 0 | 1 |
| टी२० | 73 | 210 | 34* | 9.54 | 0 | 0 |
शेन वार्न के गेंदबाज़ी कीर्तिमान:
| गेंदबाज़ी | मैच | विकेट | सर्वश्रेष्ठ | औसत | इकॉनमी |
| टेस्ट | 145 | 708 | 8/71 | 25.41 | 2.65 |
| एकदिवसीय | 194 | 293 | 5/33 | 25.73 | 4.25 |
| टी२० | - | - | - | - | - |
| प्रथम श्रेणी | 301 | 1319 | 8/71 | 26.11 | 2.76 |
| लिस्ट ए | 311 | 473 | 6/42 | 24.61 | 4.25 |
| टी२० | 73 | 70 | 4/21 | 26.61 | 7.22 |
टेस्ट पदार्पण - ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत, सिडनी जनवरी 2, 1992
अंतिम टेस्ट - ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड, सिडनी जनवरी 2, 2007
एकदिवसीय पदार्पण - न्यूज़ीलैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया, वेलिंगटन मार्च 24,
1993
अंतिम एकदिवसीय - एशिया XIबनाम विश्व XI, मेलबोर्न जनवरी 10, 2005
Anil Kumble Records
शेन वार्न केवल जादुई घुमाव ही नहीं निकालते थे पर वे बेहद सटीकता के साथ लम्बे समय तक लगातार गेंदबाज़ी भी कर सकते थे, ये एक ऐसा हुनर जो लेग स्पिन गेंदबाज़ों में शायद ही देखने को मिले. वार्न यूँ तो जल्द ही ऑस्ट्रेलिया गेंदबाज़ी की रीढ़ बन चुके थे लेकिन बल्ले के साथ भी वे आक्रामक पारियां खेल कई मौको पर ऑस्ट्रेलिया को जीत दिला दिया करते थे. हालाँकि शेन वार्न दिखने में इतने चुस्त और सुडौल नहीं लगते थे लेकिन वे एक बहुत प्रभावी फील्डर भी थे, ख़ास तौर पर स्लिप के इलाके में जहाँ वे कई असंभव कैच लपक लिया करते थे. इन सभी कुशलताओं के साथ ही वार्न का विवादों से भी गहरा नाता रहा जो लगातार उनके करियर के कई पड़ावों पर आए लेकिन इसने वार्न के प्रदर्शन पर कभी प्रभाव नहीं डाला.
Mushtaq Ahmed Records
शेन वार्न ने 1992 में टेस्ट क्रिकेट से अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण किया और ज़्यादातर लेग स्पिनरों की तरह शुरूआती दिनों में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. सटीकता की कमी प्रत्यक्ष थी लेकिन वार्न की प्रतिभा पर किसी को रक्ति भर भी संशय नहीं था. वार्न ने साबित किया के वे जल्द सीखने वाले क्रिकेट विद्यार्थी हैं और अगले ही साल उन्होंने एशेज सीरीज़ में "बॉल ऑफ़ दी सेंचुरी" फेंक कर माइक गैटिंग को आउट किया. ये एक ऐसी गेंद थी जिसने ठप्पा लेग विकेट के बहार खाया, माइक गैटिंग ने इस मामूली सी गेंद पर बल्ला उठा कर कोई शॉट मारने का प्रयास नहीं किया लेकिन गेंद ऐसी घूमी की गैटिंग के ऑफ स्टंप की बेल उड़ा गयी. माइक गैटिंग जैसे बड़े बल्लेबाज़ को इस प्रकार चमका देकर आउट करना शेन वार्न को विश्व के सभी क्रिकेट प्रेमियों की नज़रों में ले आया. लेकिन वार्न का शिकार होने वाले गैटिंग अकेले बल्लेबाज़ नहीं थे, इसके बाद वार्न ने दुनिया के सबसे धुरंधर बल्लेबाज़ों को अपनी फिरकी से नचा कर आउट करना अपनी आदत बना लिया. और सबसे बड़ी बात थी वार्न की वो निरंतरता जो उनके युवा दिनों में कम दिखती थी.
Anil Kumble Records
शेन वार्न केवल जादुई घुमाव ही नहीं निकालते थे पर वे बेहद सटीकता के साथ लम्बे समय तक लगातार गेंदबाज़ी भी कर सकते थे, ये एक ऐसा हुनर जो लेग स्पिन गेंदबाज़ों में शायद ही देखने को मिले. वार्न यूँ तो जल्द ही ऑस्ट्रेलिया गेंदबाज़ी की रीढ़ बन चुके थे लेकिन बल्ले के साथ भी वे आक्रामक पारियां खेल कई मौको पर ऑस्ट्रेलिया को जीत दिला दिया करते थे. हालाँकि शेन वार्न दिखने में इतने चुस्त और सुडौल नहीं लगते थे लेकिन वे एक बहुत प्रभावी फील्डर भी थे, ख़ास तौर पर स्लिप के इलाके में जहाँ वे कई असंभव कैच लपक लिया करते थे. इन सभी कुशलताओं के साथ ही वार्न का विवादों से भी गहरा नाता रहा जो लगातार उनके करियर के कई पड़ावों पर आए लेकिन इसने वार्न के प्रदर्शन पर कभी प्रभाव नहीं डाला.
Mushtaq Ahmed Records
शेन वार्न ने 1992 में टेस्ट क्रिकेट से अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण किया और ज़्यादातर लेग स्पिनरों की तरह शुरूआती दिनों में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. सटीकता की कमी प्रत्यक्ष थी लेकिन वार्न की प्रतिभा पर किसी को रक्ति भर भी संशय नहीं था. वार्न ने साबित किया के वे जल्द सीखने वाले क्रिकेट विद्यार्थी हैं और अगले ही साल उन्होंने एशेज सीरीज़ में "बॉल ऑफ़ दी सेंचुरी" फेंक कर माइक गैटिंग को आउट किया. ये एक ऐसी गेंद थी जिसने ठप्पा लेग विकेट के बहार खाया, माइक गैटिंग ने इस मामूली सी गेंद पर बल्ला उठा कर कोई शॉट मारने का प्रयास नहीं किया लेकिन गेंद ऐसी घूमी की गैटिंग के ऑफ स्टंप की बेल उड़ा गयी. माइक गैटिंग जैसे बड़े बल्लेबाज़ को इस प्रकार चमका देकर आउट करना शेन वार्न को विश्व के सभी क्रिकेट प्रेमियों की नज़रों में ले आया. लेकिन वार्न का शिकार होने वाले गैटिंग अकेले बल्लेबाज़ नहीं थे, इसके बाद वार्न ने दुनिया के सबसे धुरंधर बल्लेबाज़ों को अपनी फिरकी से नचा कर आउट करना अपनी आदत बना लिया. और सबसे बड़ी बात थी वार्न की वो निरंतरता जो उनके युवा दिनों में कम दिखती थी.
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